कालपी में अवैध खनन पर गंभीर सवाल

तरीबुल्दा घाट की गतिविधियों ने बढ़ाई चिंता, जांच की मांग तेज कालपी (जालौन) यमुना किनारे स्थित तरीबुल्दा घाट पर कथित अवैध खनन को
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2026-03-28 22:56:36

तरीबुल्दा घाट की गतिविधियों ने बढ़ाई चिंता, जांच की मांग तेज कालपी (जालौन) यमुना किनारे स्थित तरीबुल्दा घाट पर कथित अवैध खनन को लेकर स्थिति लगातार गंभीर होती नजर आ रही है। क्षेत्र में सामने आ रहे वीडियो और स्थानीय स्तर पर मिल रही जानकारी ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर कई महत्वपूर्ण प्रश्न खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि जिस स्थान पर खनन की अनुमति नहीं है, वहां मशीनों के माध्यम से बड़े पैमाने पर रेत निकासी की जा रही है? यदि ऐसा है, तो क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं है? और यदि जानकारी है, तो अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की गई? स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिन-रात भारी मशीनों का संचालन हो रहा है, जिससे नदी की धारा और किनारों को नुकसान पहुंच रहा है? क्या यह पर्यावरणीय मानकों का उल्लंघन नहीं है? क्या संबंधित एजेंसियों द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया है?यह भी सवाल उठ रहा है कि ओवरलोड वाहनों की आवाजाही खुलेआम जारी है? क्या परिवहन और खनन विभाग की संयुक्त जिम्मेदारी तय नहीं होनी चाहिए? इन वाहनों की जांच क्यों नहीं हो रही? क्षेत्र में यह चर्चा भी है कि खनन गतिविधियां तय पट्टा क्षेत्र से बाहर संचालित हो रही हैं? यदि ऐसा है, तो पट्टा शर्तों का उल्लंघन करने वालों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई? क्या किसी जिम्मेदार अधिकारी की जवाबदेही तय की गई? राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों के पालन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है? क्या खनन कार्य NGT के दिशा-निर्देशों के अनुरूप हो रहा है? यदि नहीं, तो निगरानी तंत्र कहां है? तरीबुल्दा घाट के समीप स्थित धार्मिक स्थल और सुरक्षा दीवार को संभावित नुकसान की आशंका भी जताई जा रही है? क्या प्रशासन ने इस संबंध में कोई सर्वे या सुरक्षा मूल्यांकन कराया है स्थानीय स्तर पर यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि पूरी प्रक्रिया में संगठित तरीके से काम किया जा रहा है? यदि यह सही है, तो क्या यह एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा नहीं करता? और यदि नहीं, तो इन आरोपों का आधिकारिक खंडन क्यों नहीं किया गया गौरतलब है कि अन्य क्षेत्रों में कार्रवाई की खबरें सामने आई हैं, लेकिन तरीबुल्दा घाट पर अपेक्षित सख्ती नजर नहीं आ रही? क्या कार्रवाई केवल चुनिंदा स्थानों तक सीमित है प्रशासन द्वारा जांच टीम गठित करने की बात कही गई है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या यह जांच समयबद्ध होगी? क्या इसकी रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या दोषियों पर ठोस कार्रवाई सुनिश्चित होगी? फिलहाल स्थिति को लेकर क्षेत्र में असंतोष बना हुआ है। ऐसे में आवश्यक है कि संबंधित विभाग पारदर्शिता के साथ तथ्य सामने रखें और उठ रहे सभी सवालों का स्पष्ट जवाब दें, ताकि स्थिति स्पष्ट हो सके और जनविश्वास बना रहे।

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