2025-03-23 15:09:36
मैं जिंदा हूं दिल की दीवारों में, बैठी हूं खत के पिटारों में, मफ़िल सजती होगी शायद, मेरी जन्म की खुशी में, पर मैं खुश हूं, भीड़ से दूर दो चार यारों में, नहीं जरूरत है मुझको, ना मैं जाना चाहूं , उस भीड़ हज़ारों में, मैं खुश हूं.......... मैं जिंदा हूं ........ इन चार दीवारों में