जिले की चीनी मिलों पर 316 करोड रुपए गन्ना भुगतान बकायाभगत सिंह वर्मा।

गन्ने का लाभकारी मूल्य ₹700 कुंतल कराने तक संघर्ष जारी रहेगा-भगत सिंह वर्मा। संस्कार उजाला जिला प्रभारी सहारनपुर-आज यहां ग्राम
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2026-03-28 21:04:18

गन्ने का लाभकारी मूल्य ₹700 कुंतल कराने तक संघर्ष जारी रहेगा-भगत सिंह वर्मा। संस्कार उजाला जिला प्रभारी सहारनपुर-आज यहां ग्राम चंद्रोली मुगल माजरा में किसानों की एक बैठक को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन वर्मा व पश्चिम प्रदेश मुक्ति मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कहा कि सहारनपुर जिले की 8 चीनी मिलों पर जिले के गन्ना किसानों का 316 करोड रुपए गन्ना भुगतान बकाया है। जिसमें टोडरपुर चीनी मिल पर पिछले वर्ष का भी 20 करोड रुपए गन्ना भुगतान बकाया है। जिसे दिलाने के लिए भाजपा की योगी सरकार गन्ना विभाग व प्रशासन चीनी मिल मालिकों के विरोध कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पा रहा है। गन्ना किसान कड़ी मेहनत करके बैंकों से व समितियां से कर्ज लेकर 1 वर्ष तक गन्ने की फसल को तैयार करता है। उसके बाद जब चीनी मिलों में गन्ना चला जाता है। तो फिर चीनी मिल मालिकों की मर्जी है कि वह गन्ना किसानों को 14 दिन के अंदर करना भुगतान करें या 14 महीने में भुगतान दें। जिस पर प्रदेश सरकार चुप्पी सादे हुए बैठी है। नियम के अनुसार 14 दिन के अंदर गन्ना किसानों को चीनी मिलों से भुगतान हो जाना चाहिए अन्यथा चीनी मिल मालिकों को गन्ना किसानों को 15% वार्षिक दर से ब्याज का भुगतान करना चाहिए। राष्ट्रीय अध्यक्ष भगत सिंह वर्मा ने कहा कि सहारनपुर जिले की आठ चीनी मिलों पर पिछले वर्षों में देरी से किए गए गन्ना भुगतान पर लगा ब्याज 600 करोड रुपए से भी अधिक हो गया है। जिसे दिलाने के लिए माननीय हाईकोर्ट व माननीय सुप्रीम कोर्ट ने चीनी मिल मालिकों के विरुद्ध आदेश किए हुए हैं। इसके बावजूद भी भाजपा की योगी सरकार गन्ना किसानों को चीनी मिलों से ब्याज का भुगतान नहीं करा रही है। गन्ना किसान भुगतान न होने के कारण भारी आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है। किसान के पास अगली फसल को तैयार करने के लिए पैसे नहीं है। और एक-एक रुपए को किसान मोहताज है। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि सहारनपुर मंडल की 19 चीनी मिलों पर 1011 करोड रुपए गन्ना भुगतान व पिछले वर्षों में देरी से किए गए गन्ना भुगतान पर लगा ब्याज 1800 करोड रुपए बकाया है। भगत सिंह वर्मा ने कहा कि गन्ना किसानों की लगातार बढ़ती हुई लागत को देखते हुए और बढ़ती हुई महंगाई के कारण गन्ने का लाभकारी मूल्य कम से कम ₹700 कुंतल होना चाहिए। डॉ एम एस स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट C2 + 50% के अनुसार गन्ने का लाभकारी मूल्य 825 रुपए कुंतल होना चाहिए। 1967 को आधार वर्ष मानकर गन्ने का लाभकारी मूल्य₹10000 प्रति कुंतल से भी अधिक होना चाहिए। 1967 में सोना 10 ग्राम 125 रुपए का होता था। जो आज 1000 गुना से भी अधिक बढ़ गया है। 1967 में गन्ने का मूल्य ₹12 रुपए 10 पैसे कुंटल होता था। भगत सिंह वर्मा ने चीनी मिलों के कांटों में हो रही भारी घटतौलि के प्रति रोष प्रकट करते हुए कहा कि घटतौलि करने वाले चीनी मिल मालिको और गन्ना समिति के सचिव को जिम्मेदार मानते हुए जेल भेजा जाए। भगत सिंह वर्मा ने केंद्र व प्रदेश सरकार से मनरेगा योजना को सीधा खेती से जोड़कर किसानों को मजदूर उपलब्ध कराने की भी मांग की गई। भगत सिंह वर्मा ने प्रदेश सरकार गन्ना विभाग प्रशासन को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द ही गन्ना किसानों का गन्ना भुगतान न किया गया और ब्याज न दिलाया गया घटतौली को न रोका गया और गाने का लाभकारी मूल्य ₹700 कुंतल न किया गया और मनरेगा योजना को सीधा खेती से नहीं जोड़ा गया तो गन्ना किसान बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। बैठक की अध्यक्षता जिला उपाध्यक्ष मोहम्मद मुकर्रम प्रधान ने की और संचालन प्रदेश महासचिव संदीप एडवोकेट ने किया। बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष पंडित नीरज कपिल प्रदेश सचिव मास्टर रईस अहमद जिला मंत्री महबूब हसन हाजी बुद्धू हसन हाजी साजिद मोहम्मद कामिल मोहम्मद सद्दाम मोहम्मद सरफराज अब्दुल सलाम मोहम्मद मुनव्वर राशिद आदि ने भाग लिया।

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