क्राइम ब्रांच ने पाकिस्तान नेपाल बांग्लादेश से जुड़ा इंटरनेशनल हथियार

माधव कुमार संवाददातादिल्लीः दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बेहद संवेदनशील ऑपरेशन के तहत एक अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस मॉड्यू
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2026-03-26 00:20:07

क्राइम ब्रांच ने पाकिस्तान नेपाल बांग्लादेश से जुड़ा इंटरनेशनल हथियार तस्करी मॉड्यूल किया ध्वस्त, 10 गिरफ्तारमाधव कुमार संवाददातादिल्लीः दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक बेहद संवेदनशील ऑपरेशन के तहत एक अंतरराष्ट्रीय हथियार तस्करी के नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। इस मॉड्यूल के तार पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश से जुड़े हुए थे। पुलिस ने दिल्ली के वॉल्ड सिटी (पुरानी दिल्ली) इलाके से संचालित होने वाले इस गिरोह के 10 प्रमुख गुर्गों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से 21 घातक विदेशी हथियार और 200 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। बरामद हथियारों में चेक रिपब्लिक निर्मित सब-मशीन गन, तुर्की की स्टोजर (Stoeger), चीन की PX-3, इटली की बरेटा (Beretta), ब्राजील की टॉरस और जर्मनी की वाल्थर पिस्तौलें और विशेष रूप से PX-5.7 पिस्तौल, जिसका उपयोग आमतौर पर केवल स्पेशल फोर्सेज करती हैं, उन्हें बरामद किया है।छापेमारी कर दबोचे गिरोह के सदस्यपुलिस अधिकारी ने बताया कि क्राइम ब्रांच की एंटी रॉबरी स्नैचिंग सेल के इंस्पेक्टर मान सिंह के सुपरविजन में इंस्पेक्टर सुंदर गौतम और अन्यों की टीम ने तकनीकी निगरानी से संदिग्धों के कॉल रिकॉर्ड्स खंगाले। मुखबिरों की मदद से उनकी मूवमेंट का महीनों तक विश्लेषण किया गया। इसके बाद 13-14 मार्च को पुख्ता सूचना के आधार पर छापेमारी कर गिरोह के सदस्यों राहिल, हाशिम, सैम, सोनू गुप्ता, घनश्याम, वसीम, निशांत, नवाब, नौमान और नौशाद को दबोच लिया गया। पाकिस्तान से नेपाल के रास्ते भारत में एंट्रीपूछताछ में आरोपियों ने खुलासा किया है कि इस मॉड्यूल का मास्टरमाइंड शाहबाज अंसारी (बुलंदशहर, यूपी निवासी) है। वह पाकिस्तान से हथियार मंगवाता था, जिन्हें नेपाल और बांग्लादेश की सीमाओं के जरिए भारत में तस्करी कर लाया जाता था। इन आधुनिक हथियारों की सप्लाई दिल्ली-NCR और उत्तर भारत के खूंखार अपराधी गिरोहों को की जानी थी।पुरानी दिल्ली की तंग गलियों को बनाया सेफ हाउसजांच में सामने आया कि आरोपी जामा मस्जिद और अजमेरी गेट जैसे घनी आबादी वाले इलाकों का इस्तेमाल हथियारों को छिपाने और ट्रांजिट जोन के रूप में कर रहे थे। ये लोग पकड़े जाने से बचने के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स, वीओआईपी कॉल्स और बार-बार सिम कार्ड बदलने का सहारा लेते थे। पैसों का लेनदेन पूरी तरह हवाला नेटवर्क के जरिए किया जाता था।

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