2025-01-05 21:03:26
कर लें चिंतन हम भोले का,
भोले पार लगाएंगे,
जीवन की फाका-मस्ती में,
भोले की धुन गाएंगे।
कर लें चिंतन ....
भटक रहे अपने लक्ष्यों से,
अहम की चारदिवारी में,
प्रेम,भक्ति की सुध ले लें,
जुड़ जाएगे भोले से।
कर लें चिंतन ....
नयन झुकाकर जब देखेंगे,
अपने कर्मों की क्यारी,
या छलकेंगे आंसू तेरे,
या भोले को पाएंगे।
कर लें चिंतन ....
इसीलिए कहते जीवन में,
राग-द्वेष से दूर रहो,
भोले से सब लेते हो तो,
देने से मत दूर रहो।
कर लें चिंतन ...
आओ सारे जन मिलकर अब,
प्रेम की अलख जला लें हम,
है भोले की भोली सूरत,
बस उसकी धुली लगालें हम।
कर लें चिंतन ....
(246/195 वां मनका)
कार्तिकेय कुमार त्रिपाठी राम
सी स्पेशल, गांधीनगर, इन्दौर