बरसाती पानी की निकासी के लिए खर्च होंगे 30.50 करोड़ रुपए विधायक अनिल यादव

लीलोढ़, पाल्हावास, पहराजवास, खेड़ा रसूलपुर, सुमा खेड़ा, नैन सुखपुरा, रतनथल, बास, मोहदीपुर के किसानों को जलभराव से मिलेगी राहत
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2026-03-03 14:16:44

कोसली। कोसली विधानसभा क्षेत्र के गांवों में बरसात के समय होने वाली जलभराव की समस्या को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा सरकार ने 30 करोड़ 50 लाख रुपए की परियोजनाएं तैयार की हैं। जिनका अगले सप्ताह में टेंडर हो जाने की उम्मीद है।  हर साल मानसून सीजन में कोसली हलका के करीब एक दर्जन से अधिक गांवों में जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाती है। जिस कारण फसलों की बर्बादी तो होती ही है, आम जनजीवन पर भी इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए सिंचाई विभाग ने एक बड़ी योजना तैयार की थी, जिसे चंडीगढ़ से स्वीकृति मिल चुकी है।

योजना के मुताबिक गांव लीलोढ़ के आसपास झाड़ली पावर प्लांट का लो-लाइन एरिया लगता है। जिसमें बारिश के दिनों में भारी मात्रा में जलभराव हो जाता है। यहां सिंचाई विभाग 12 करोड़ की राशि खर्च कर परमानेंट पाइपलाइन व पंप हाउस आदि स्थापित कर पानी को महेंद्रगढ़ कैनाल व छुछकवास के नजदीक ड्रेन नंबर आठ में निकालेगा। गांव पहराजवास और पाल्हावास के समीप बरसात के मौसम में करीब 300 एकड़ की भूमि जलमग्न हो जाती है। यहां तीन किलोमीटर लंबी पाइपलाइन व पंप स्थापित कर पटौदी डिस्ट्रीब्यूटरी में पानी को निकालने की योजना बनाई गई है, जिस पर 7 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।

इसी प्रकार गांव खेड़ा रसूलपुर में 1.5 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछा कर पंप से बरसाती पानी को पटौदी डिस्ट्रीब्यूटरी में ड्रेन आउट किया जाएगा। जिस पर 3.5 करोड़ रुपए की लागत आएगी। गांव सुमा खेड़ा में 6 करोड़ रुपए की लागत से ड्रेन रुपी पाइपलाइन बिछा कर जेएलएन कैनाल बावल में बारिश के पानी को निकाला जाएगा। गांव नैन सुखपुरा में दो करोड़ रुपए की लागत से पंप हाउस व पाइपलाइन को बिछा कर पानी जेएलएन कैनाल में डाला जाएगा। इस तरह कुल 30 करोड़ 50 लाख रुपए की इन परियोजनाओं से बरसाती पानी की निकासी का स्थाई समाधान करवाया जाएगा। जिससे ग्रामीणों को काफी राहत मिलेगी और उनकी खरीफ सीजन की फसल को खराब होने से बचाया जा सकेगा।

विधायक अनिल यादव ने कहा  कि गांव लीलोढ़, पाल्हावास, पहराजवास, खेड़ा रसूलपुर, सुमा खेड़ा, नैन सुखपुरा, रतनथल, बास, मोहदीपुर, चंदनवास, आसियाकी, गोरावास, कतोपुरी आदि में पानी भरने की वजह से किसानों को हर साल भारी नुकसान उठाना पड़ता है। गत वर्ष मानसून सीजन में 100 से अधिक पंप और मोटरें लगाकर पानी निकासी की व्यवस्था की गई, लेकिन शत-प्रतिशत सफलता नहीं मिली।  उन्होंने इस विषय में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से मुलाकात की थी। जिसके बाद कोसली हलका के लिए 30 करोड़ 50 लाख रुपए की इन सात परियोजनाओं को मंजूर किया गया है।

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