महापुरुषों के विचारों से सामाजिक परिवर्तन का संकल्प नायब सिंह सैनी

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय में आयोजित एक विशेष समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की।
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2026-04-24 17:45:29

हरियाणा । हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने चंडीगढ़ स्थित सिविल सचिवालय में आयोजित एक विशेष समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। यह कार्यक्रम डॉ भीमराव अंबेडकर और महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज का दिन उन दो महान विभूतियों को स्मरण करने का अवसर है, जिन्होंने अपने विचारों और कर्मों से देश और समाज को नई दिशा दी। उन्होंने भारत माता के इन सपूतों को कोटि-कोटि नमन करते हुए कहा कि दोनों महान नेताओं ने अपना संपूर्ण जीवन समाज के उन वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया, जिन्हें सदियों तक उपेक्षित और वंचित रखा गया।

मुख्यमंत्री ने महात्मा ज्योतिबा फुले के योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्होंने छुआछूत, अज्ञानता और अंधविश्वास के खिलाफ लड़ाई में शिक्षा को सबसे बड़ा हथियार बनाया। वहीं डॉ भीमराव अंबेडकर ने शिक्षा, समानता और न्याय को अपने जीवन का मूल मंत्र बनाया। उनका प्रसिद्ध आह्वान—“शिक्षित बनो, संगठित रहो और संघर्ष करो”—केवल एक नारा नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का सशक्त उद्घोष है।

उन्होंने कहा कि बाबा साहेब और ज्योतिबा फुले ने न केवल वंचित वर्गों के उत्थान के लिए कार्य किया, बल्कि महिलाओं की स्थिति सुधारने के लिए भी महत्वपूर्ण योगदान दिया। मुख्यमंत्री ने लोगों से आह्वान किया कि इन महान विभूतियों के विचारों को केवल पुस्तकों तक सीमित न रखें, बल्कि उन्हें अपने व्यवहार और नीतियों में भी अपनाएं।

राज्य सरकार की पहलों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए “दीनदयाल लाडो लक्ष्मी योजना” शुरू की गई है। इसके साथ ही पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

उन्होंने यह भी बताया कि पिछड़ा वर्ग ‘बी’ को पंचायती राज संस्थाओं और शहरी स्थानीय निकायों में आरक्षण देकर राजनीतिक रूप से सशक्त किया गया है। अनुसूचित जातियों को प्रथम एवं द्वितीय श्रेणी के पदों में 20 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया गया है।

इसके अतिरिक्त, अनुसूचित जाति और पिछड़े वर्ग के छात्रों को शिक्षा के प्रोत्साहन के रूप में प्रतिवर्ष 12 हजार रुपये तक की छात्रवृत्ति दी जा रही है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में कहा कि सरकार सामाजिक न्याय, समानता और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध है, और इन महान नेताओं के आदर्शों को आगे बढ़ाने का कार्य निरंतर जारी रहेगा।

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