वसन्त महिला महाविद्यालय में त्रिदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का हुआ उद्घाटन ||

प्रोफेसर परवीन सुल्ताना ने पी पी टी के माध्यम से त्रिदिवसीय कार्यशाला में इंडिगो से सम्बंधित अनेक पहलुओं की दी जानकारी ||
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2025-04-03 22:02:22

वाराणसी:- राजघाट स्थित वसन्त महिला महाविद्यालय में महिला उद्यम को प्रोत्साहित करने हेतु चित्रकला विभाग एवं एनी बेसेंट कौशल विकास और उद्यमिता केन्द्र के संयुक्त तत्वावधान में इंडिगो अनुभव पारंपरिक इंडिगो रंगाई तकनीकों की समझविषय पर तीन अप्रैल गुरुवार कों त्रिदिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का उद्घाटन हुआ | इस कार्यशाला में गुजरात प्रदेश के कच्छ से आए कुशल प्रशिक्षक नरेश के.सिजू (द इंडिगो मैन) द्वारा तीन दिनों तक छात्राओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में दीप प्रज्वालन के पश्चात् अभ्यागत अतिथियों का स्वागत किया गया तत्पश्चात महाविद्यालय की प्राचार्या प्रोफेसर अलका सिंह ने सभी का स्वागत करते हुए इस कार्यशाला के महत्व पर प्रकाश डाला | प्राचार्या ने महाविद्यालय में अगले सत्र से आरम्भ होने वाले बी.एफ.ए.कार्यक्रम की सूचना दी प्रोफेसर सत्येन्द्र बावनी ने सभी छात्राओं को इंडिगो तकनीक को जानने की प्रेरणा दी | प्रोफेसर परवीन सुल्ताना ने पी पी टी के माध्यम से इस त्रिदिवसीय कार्यशाला में होने वाले गतिविधियों की सूचना देते हुए इंडिगो से सम्बंधित अनेक पहलुओं की जानकारी दी | इस कार्यक्रम में इंडिगो के तकनीकी जानकारी से नए उद्यम से जुड़ने की सम्भावनाओं से परिचित कराया गया | काशी हिन्दू विश्वविद्यालय की दृश्यकला संकाय से आई प्रोफेसर जसमिन्दर कौर ने इस कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए इस कार्यशाला को कला की समझ को विकसित करने का साधन बताया उन्होंने इंडिगो की प्रसिद्धि के कारणों को बतलाते हुए प्राकृतिक माध्यम से प्राप्त इंडिगो को अधिक उपयुक्त बताया उन्होंने बताया कि प्राकृतिक इंडिगो के अधिक महंगे होने के कारण आज कल लोग सिंथेटिक इंडिगो का ज्यादा उपयोग करते हैं उन्होंने बंगाल में ब्रिटिश राज के विरोध में हुए इंडिगो से जुड़े आन्दोलन की जानकारी देते हुए दीनबंधु जी के नील दर्पण नामक नाटक के प्रभाव की जानकारी दी | ज्ञातव्य है कि इस नाटक के कारण ब्रिटिश राज को कानून बनाने के लिए बाध्य होना पड़ा उन्होंने मोतिहारी बिहार में इंडिगो से जुड़े विद्रोह की भी जानकारी दी | ज्ञातव्य है कि महात्मा गांधी का चम्पारण सत्याग्रह आन्दोलन भी इसी घटना से प्रेरित था उन्होंने बताया कि स्वतंत्रता के पूर्व हुए आन्दोलनों के कारण ही भारत में किसानों के समान में 23 दिसंबर को इंडिगो डे मनाया जाता है उन्होंने इंडिगो के औषधीय गुणों को भी प्रकाशित किया उन्होंने टेक्स- टाइल्स में होने वाले इंडिगो के अनेक प्रकार के उपयोगों की जानकारी देते हुए इंडिगो के पौधे से शुरू करते हुए डाइंग तक की पूरी प्रक्रिया का विस्तार से वर्णन किया | प्रशिक्षक नरेश सिजू ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए छात्राओं को उद्यम के स्तर तक जाने की शुभकामनाएं दी | इस कार्यक्रम में बिहार से आई खादी उद्यमी कावेरी सिंह,महाविद्यालय की प्रोफेसर विभा जोशी,प्रोफेसर अर्चना त्रिपाठी,प्रोफेसर संजीव कुमार,प्रोफेसर रविन्द्र नाथ मोहन्ता,प्रोफेसर मंजरी झुनझुनवाला,डॉ अंजना सिंह,डॉ राजेश चौधरी,डॉ राजेश चौरसिया,डॉ योगिता बेरी,डॉ पुनीता पाठक,डॉ मनीषा मिश्रा,डॉ आकांक्षा श्रीवास्तव,डॉ जितेन्द्र लालवानी फ्रेंच विभाग के डॉ संदीप पाण्डेय एवं महाविद्यालय के उद्यमिता केन्द्र के सभी सदस्यों की उपस्थिति रही | कार्यक्रम का संचालन डॉ सिमर कौर ने एवं धन्यवाद ज्ञापन केन्द्र के समन्वयक प्रोफेसर सौरभ कुमार सिंह ने किया ||

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