2025-01-22 17:26:51
मणिपुर की बीजेपी सरकार से जेडीयू के समर्थन वापसी चिट्ठी के बाद दिल्ली से पटना तक सियासी खलबली मच गई। आनन-फानन में किसी तरह हालात को संभालने के लिए सियासी मैनेजरों को मुस्तैद किया गया। इसका नतीजा रहा कि मणिपुर जनाता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष बीरेन सिंह को पद से हटा दिया गया। उन्होंने अपनी चिट्ठी में जेडीयू को एनडीए से अलग होने का दावा किया था। जेडीयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने इसे गलत बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी अब भी एनडीए के साथ है। मणिपुर में एनडीए सरकार बनी रहेगी। मणिपुर के जेडीयू नेता की ये कार्रवाई अनुशासनहीनता थी। इसलिए उन्हें हटाया गया है। उन्होंने बिना केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत किए यह पत्र लिखा था। जेडीयू की मणिपुर इकाई राज्य के विकास के लिए काम करती रहेगी।राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि वह भ्रामक और निराधार है। पार्टी ने इसका संज्ञान लिया है और पार्टी की मणिपुर इकाई के अध्यक्ष को उनके पद से मुक्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि हमने एनडीए को समर्थन दिया है और मणिपुर में एनडीए सरकार को हमारा समर्थन भविष्य में भी जारी रहेगा। मणिपुर इकाई ने केंद्रीय नेतृत्व से कोई संवाद नहीं किया, उन्हें विश्वास में नहीं लिया गया। उन्होंने (मणिपुर जेडीयू प्रमुख) खुद ही पत्र लिखा था। इसे अनुशासनहीनता मानते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और उन्हें पद से मुक्त कर दिया गया। पार्टी प्रवक्ता ने साफ तौर पर कहा कि हम एनडीए के साथ हैं और राज्य इकाई राज्य के विकास के लिए मणिपुर के लोगों की सेवा करना जारी रखेगी। मणिपुर में 2022 के विधानसभा चुनाव में जेडीयू ने छह सीटें जीतीं, लेकिन चुनाव के कुछ महीनों बाद, पांच विधायक भाजपा में चले गए, जिससे सत्तारूढ़ दल की संख्या मजबूत हो गई। 60 सदस्यीय विधानसभा में फिलहाल बीजेपी के 37 विधायक हैं। इसे नागा पीपुल्स फ्रंट के पांच विधायकों और तीन निर्दलीय विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिससे इसे आरामदायक बहुमत मिल गया है। इससे पहले मणिपुर की जदयू इकाई के प्रमुख केश बीरेन सिंह ने राज्यपाल अजय कुमार भल्ला को पत्र लिखकर घटनाक्रम की जानकारी दी थी।