2025-03-12 16:13:44
सर्वजन सुखाय सामाजिक संस्था की अध्यक्ष पुष्पा पटेल ने, संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम के दौरान मातृशक्ति को होली उत्सव की शुभकामनाएं देते हुए कहा की होली हमारे भारतीय संस्कृति का महत्वपूर्ण त्यौहार है शांति के सद्भावना भाईचारा बनाए रखने के लिए हम एक दूसरे के प्रति गले मिलकर होली पर्व बनाते हैं उन्होंने कहा भक्त प्रहलाद भगवान के भक्त थे और जिस तरह होलिका ने भक्त पहलाद को अपनी गोदी में लेकर अग्नि में बैठ गई और होली का तो जल गई लेकिन भक्त प्रहलाद श्री राम जी का उद्घोष करते हुए बच गए और तभी से हमारा होली का पर्व यह प्रारंभ होता है। संस्था अध्यक्ष पुष्पा पटेल ने कहा कि गारंटी के साथ होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है, जो आज विश्वभर में मनाया जाने लगा है रंगों का त्यौहार कहा जाने वाला यह पर्व पारंपरिक रूप से दो दिन मनाया जाता है। यह प्रमुखता से भारत तथा नेपाल में मनाया जाता है। यह त्यौहार कई अन्य देशों जिनमें अल्पसंख्यक हिन्दू लोग रहते हैं वहाँ भी धूम-धाम के साथ मनाया जाता है।[2] पहले दिन को होलिका जलायी जाती है, जिसे होलिका दहन भी कहते हैं। दूसरे दिन, जिसे प्रमुखतः धुलेंडी व धुरड्डी, धुरखेल या धूलिवंदन इसके अन्य नाम हैं, लोग एक दूसरे पर रंग, अबीर-गुलाल इत्यादि फेंकते हैं, ढोल बजा कर होली के गीत गाये जाते हैं और घर-घर जा कर लोगों को रंग लगाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि होली के दिन लोग पुरानी कटुता को भूल कर गले मिलते हैं और फिर से दोस्त बन जाते हैं। एक दूसरे को रंगने और गाने-बजाने का दौर दोपहर तक चलता है। इसके बाद स्नान कर के विश्राम करने के बाद नए कपड़े पहन कर शाम को लोग एक दूसरे के घर मिलने जाते हैं, गले मिलते हैं और मिठाइयाँ खिलाते हैं।राग-रंग का यह लोकप्रिय पर्व वसंत का संदेशवाहक भी है।राग अर्थात संगीत और रंग तो इसके प्रमुख अंग हैं ही पर इनको उत्कर्ष तक पहुँचाने वाली प्रकृति भी इस समय रंग-बिरंगे यौवन के साथ अपनी चरम अवस्था पर होती है। फाल्गुन माह में मनाए जाने के कारण इसे फाल्गुनी भी कहते हैं। होली का त्यौहार वसंत पंचमी से ही आरंभ हो जाता है। उसी दिन पहली बार गुलाल उड़ाया जाता है। इस दिन से फाग और धमार का गाना प्रारंभ हो जाता है। खेतों में सरसों खिल उठती है। बाग-बगीचों में फूलों की आकर्षक छटा छा जाती है। पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और मनुष्य सब उल्लास से परिपूर्ण हो जाते हैं। खेतों में गेहूँ की बालियाँ इठलाने लगती हैं। बच्चे-बूढ़े सभी व्यक्ति सब कुछ संकोच और रूढ़ियाँ भूलकर ढोलक-झाँझ-मंजीरों, की गूंज गूंज उठी और महिलाओं ने होली का पर्व बनाते हुए नृत्य भी किया रुचि सिंह सविता सिंह विमला सिंह पूनम ज्योति राठौर संध्या राठौर रेनू सिंह शशि सरोज गीता प्रिंकका नीलम उषा दुबे रानी गीता, राधा जी आदि महिलाएं लोग काफी संख्या में शामिल थे